Tuesday, June 28, 2011
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Hi Friends. I am Irfan khan,an editorial cartoonist,based in New Delhi.For last 20 years I have worked for India's almost all leading newspapers and also have done my cartoons and talk shows on tv channels.
5 comments:
जो वाहन जिस समय उपलब्ध होता है वही काम लिया जाता है |
हे पार्थ!
तुच्छ बात पर शोक मत कर। मृत्योपरांत देह मात्र मृत्तिका रह जाती है। आत्मा उसे छोड़ कर चली जाती है। अब मृत्तिका का क्या सम्मान और क्या अपमान? वैसे भी हम पहले कह ही चुके हैं कि दुःख और सुख को एक समान समझना चाहिए। छत्तीसगढ़ वाले नक्सलियों और पुलिस वालों के शव को एक जैसा समझ कर इस बात का प्रमाण दे रहे हैं कि उन्हों ने कुरुक्षेत्र में दिए मेरे प्रवचन को तुम से भी अच्छी तरह समझा है।
उम्मीद करता हूँ कि वे ट्रक दिल के कूड़ा ट्रकों जैसे नहीं होंगे ।
jungle me jo wahan pehle milta hai usme nikal aate hai,achche truck ke liye rukte to shayad shav kuchh aur badh jate?
Dwivedi ji ki jay ho...
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