आईये कार्टून तलाशें

Tuesday, June 28, 2011

कूड़े में जवान!

5 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

जो वाहन जिस समय उपलब्ध होता है वही काम लिया जाता है |

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

हे पार्थ!
तुच्छ बात पर शोक मत कर। मृत्योपरांत देह मात्र मृत्तिका रह जाती है। आत्मा उसे छोड़ कर चली जाती है। अब मृत्तिका का क्या सम्मान और क्या अपमान? वैसे भी हम पहले कह ही चुके हैं कि दुःख और सुख को एक समान समझना चाहिए। छत्तीसगढ़ वाले नक्सलियों और पुलिस वालों के शव को एक जैसा समझ कर इस बात का प्रमाण दे रहे हैं कि उन्हों ने कुरुक्षेत्र में दिए मेरे प्रवचन को तुम से भी अच्छी तरह समझा है।

डॉ टी एस दराल said...

उम्मीद करता हूँ कि वे ट्रक दिल के कूड़ा ट्रकों जैसे नहीं होंगे ।

Anil Pusadkar said...

jungle me jo wahan pehle milta hai usme nikal aate hai,achche truck ke liye rukte to shayad shav kuchh aur badh jate?

Mansoor Naqvi said...

Dwivedi ji ki jay ho...